Saturday , 25 May 2019
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जॉन अब्राहम भी भारत-पाकिस्तान वॉर पर लेकर आ रहे फिल्म

बॉलीवुड के एक्शन हीरो जॉन अब्राहम भी भारत-पाकिस्तान वॉर पर फिल्म लेकर आ रहे हैं. फिल्म का नाम है. ‘रॉ- रोमियो अकबर वॉल्टर’. इस फिल्म में जॉन एक सीक्रेट एजेंट का रोल न‍िभा रहे हैं. फिल्म की कहानी 1971 की भारत-पाक लड़ाई के बैकड्रॉप पर आधारित है. ये फिल्म अप्रैल में रिलीज होगी.

1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराकर अपनी जीत का बड़ा परचम लहराया था. पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था और पूर्वी पाकिस्तान से अपना कब्जा भी छोड़ दिया था. भारत की इस जीत की वाहवाही पूरी दुनिया में हुई थी. लेकिन शायद भारतीय सेना के लिए पाकिस्तान पर इतनी बड़ी जीत मुमकिन नहीं होती, अगर पर्दे के पीछे रहकर RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) ने उनकी मदद नहीं की होती.

भारत-पाकिस्तान युद्ध में खुफिया एजेंसी रॉ ने सेना के ऑपरेशन में बहुत बड़ी मदद की थी. लेकिन क्या आपको मालूम है पर्दे के पीछे रहकर रॉ ने कैसे पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम कर दिया? कैसे मुक्तिवाहिनी का गठन कर पाक आर्मी के खिलाफ ऑपेरशन चलाया और किस तरह रॉ की मदद से भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था?

भारत-पाक युद्ध से मात्र तीन साल पहले (1968) ही रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का गठन हुआ था. तीन साल के भीतर रॉ ने दुश्मन देशों में अपने एजेंटों का बड़ा नेटवर्क फैला लिया था. पाकिस्तान में भी सेना से लेकर संसद तक रॉ ने अपने एजेंट का जाल बिछा लिया था. 1971 में पश्चिमी पाकिस्तान की सेना का पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) की आम जनता पर अत्याचार काफी बढ़ गया था.

रॉ की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जब मार्च 1971 में पश्चिमी पाकिस्तान पूर्वी पाकिस्तान पर मिलिट्री एक्शन लेने की प्लानिंग कर रहा था, तब भारत में बैठे रॉ के चीफ रामेश्वर नाथ काओ को इसकी पूरी जानकारी थी.

रॉ के पूर्व अफसर बी रमन की किताब The Kaoboys & R&AW के मुताबिक, पश्चिम से पूर्वी पाकिस्तान में आईएसआई को जितना कॉल किया जा रहा था, रॉ उन सभी कॉल को ट्रेस कर रहा था. यहां तक कि पश्चिमी पाकिस्तान का एडमिनिस्ट्रेशन जब पूर्वी पाकिस्तान के बड़े लीडर शेख मुजीबुर्रहमान की गिरफ्तारी की बात कर रहे था, तब भी रॉ का एक एजेंट वहां मौजूद था. रॉ ने उनकी हर गतिविधि की जानकारी भारत की सरकार और सेना को दे रही थी. तब इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थी.

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